शिव अग्रवाल ब्यूरोचीफ लखनऊ
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर में शराब की बिक्री और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में शराब की दुकानों के आसपास खुलेआम शराब का सेवन किया जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर निर्धारित समय से पहले अथवा समय समाप्त होने के बाद शराब बिक्री होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
उत्तर प्रदेश की आबकारी व्यवस्था में फुटकर शराब दुकानों के बिक्री समय को लेकर निर्धारित प्रावधान हैं। उपलब्ध आबकारी नीति दस्तावेज के अनुसार देशी शराब, विदेशी मदिरा, बीयर और मॉडल शॉप की बिक्री का समय सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक निर्धारित किया गया था।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले में शराब पीने और बिक्री के समय के कथित उल्लंघन की शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया।
लोगों का सवाल है कि यदि शिकायतें लगातार मिल रही हैं तो आबकारी विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच क्यों नहीं करती? क्या दुकानों के बिक्री समय, स्टॉक और लाइसेंस की शर्तों की नियमित जांच हो रही है?
सड़क किनारे जाम, राहगीरों को परेशानी
गोमती नगर जैसे विकसित और व्यस्त इलाके में शराब की दुकानों के आसपास खुले में शराब पीने की शिकायतें आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुकान से शराब खरीदने के बाद कुछ लोग आसपास ही बैठकर सेवन करते हैं। इससे सड़क और सार्वजनिक स्थानों का माहौल प्रभावित होता है।
खासकर शाम के समय महिलाओं, बच्चों और परिवार के साथ निकलने वाले लोगों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ने की शिकायतें सामने आती हैं।
पुलिस चौकी और आबकारी निगरानी पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शराब की दुकान के आसपास सार्वजनिक रूप से शराब पीने की स्थिति दिखाई दे रही है तो स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कार्रवाई केवल शिकायत आने के बाद नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण के माध्यम से भी होनी चाहिए। आबकारी विभाग की आधिकारिक नीति में अवैध शराब व्यापार, नकली शराब तथा अनधिकृत निर्माण एवं बिक्री के खिलाफ प्रवर्तन पर जोर दिया गया है।
शिकायतों का रिकॉर्ड खंगालने की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पिछले कुछ समय में प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से देखा जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शिकायतों पर कितनी जांच हुई तथा कितनी कार्रवाई की गई।
यदि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी वजह भी सामने आनी चाहिए।
औचक जांच से खुल सकता है पूरा मामला
स्थानीय नागरिकों ने गोमती नगर क्षेत्र की संबंधित शराब दुकानों पर औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। जांच के दौरान दुकान के लाइसेंस, बिक्री का समय, स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड और आसपास सार्वजनिक स्थान पर शराब सेवन की स्थिति की जांच की जा सकती है।
साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं निर्धारित समय के बाद बिक्री तो नहीं हो रही और दुकान के आसपास शराब पीने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है या नहीं।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब जरूरी
गोमती नगर जैसे महत्वपूर्ण इलाके में यदि खुलेआम शराब पीने या निर्धारित समय के उल्लंघन की शिकायतें सामने आ रही हैं तो जिम्मेदार विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सवाल सीधा है—शिकायतों के बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन जारी है, तो निगरानी कौन कर रहा है और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है?
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर मौके पर जांच करता है या मामला शिकायतों और कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहता है।

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