बालिग युवती को पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की आजादी, हाईकोर्ट का आदेश
रिमझिम साहू को मोहम्मद सलीम के साथ सुरक्षित पहुंचाने के निर्देश, अधिवक्ता रिहाना सिद्दीकी की पैरवी लाई रंग
ब्यूरो रिपोर्ट आमिर मिर्ज़ा
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका संख्या-1418/2026 में सुनवाई करते हुए 19 वर्षीय रिमझिम साहू को अपनी पसंद के व्यक्ति मोहम्मद सलीम के साथ रहने की स्वतंत्रता प्रदान की है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के जीवनसाथी का चयन करने और अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है।
मामले के अनुसार रिमझिम साहू और मोहम्मद सलीम के बीच संबंध थे। दोनों ने इससे पहले पुलिस सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप रोकने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। 16 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने और उनके शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप नहीं करने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद रिमझिम साहू को उसके पिता मनोज साहू द्वारा कथित रूप से रोककर रखा गया। मामले में 19 सितंबर को पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की बात अदालत के समक्ष रखी गई। इस पर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिमझिम साहू को अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया।
30 सितंबर को अदालत में पेश हुई युवती
अदालत के आदेश के अनुपालन में थाना थरवई, प्रयागराज के उपनिरीक्षक पंकज सिंह रिमझिम साहू को न्यायालय के समक्ष लेकर पहुंचे। अदालत ने उससे अलग से बातचीत की। रिमझिम ने बताया कि उसकी उम्र 19 वर्ष है और वह बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा है। उसने अदालत को बताया कि वह मोहम्मद सलीम के साथ संबंध में है और भविष्य में उससे विवाह करना चाहती है।
अदालत ने मोहम्मद सलीम से भी बातचीत की। उसने रिमझिम के साथ अपने संबंध को स्वीकार करते हुए उससे विवाह करने और उसके साथ रहने की इच्छा जताई। वहीं, रिमझिम के माता-पिता अपनी बेटी के निर्णय से असंतुष्ट बताए गए, लेकिन उन्होंने उसके बालिग होने की बात स्वीकार की।
पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की मिली स्वतंत्रता
दोनों पक्षों से बातचीत के बाद हाईकोर्ट ने माना कि रिमझिम साहू बालिग है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जीवन बिताने का अधिकार है। अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए रिमझिम को अपनी पसंद के व्यक्ति और अपनी पसंद के स्थान पर रहने के लिए स्वतंत्र कर दिया।
अदालत ने राज्य अधिकारियों तथा संबंधित प्रतिवादियों को मोहम्मद सलीम और रिमझिम साहू को आवश्यक पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा उन्हें उनकी पसंद के गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
अधिवक्ता रिहाना सिद्दीकी ने कहा—मेहनत रंग लाई
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रिहाना सिद्दीकी ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। अधिवक्ता के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिमझिम अब मोहम्मद सलीम के साथ अपने घर में सुरक्षित रह रही है।
अधिवक्ता रिहाना सिद्दीकी का कहना है कि यह अकेला मामला नहीं है। उनके पास ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें बालिग युवक-युवतियों ने अपनी इच्छा से विवाह या साथ रहने का निर्णय लिया और कानूनी संरक्षण के लिए न्यायालय की शरण ली। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में कानून के दायरे में रहकर पक्षकारों के अधिकारों की पैरवी करना ही उनका उद्देश्य है।
न्यायालय का संदेश स्पष्ट
इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश का मूल आधार युवती का बालिग होना और उसका अपनी इच्छा के अनुसार जीवनसाथी चुनने का स्पष्ट बयान रहा। अदालत ने उसके माता-पिता की असहमति के बावजूद उसके व्यक्तिगत निर्णय के अधिकार को महत्व देते हुए उसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की स्वतंत्रता प्रदान की।
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